उन्नीस्वी सदी के इंग्लैंड में जब सामुदायिक जमीनों पर बाड़ा बंदी हो रही थी और उन्हें निजी स्वामित्व में सौंपा जा रहा था, उस वक़्त, इंग्लैंड के लोककवियों ने कॉमन्स पर कई गीत रचे। "The Goose and the Common" ऐसी ही एक कालजयी रचना है। कबीर के दोहों की तरह इस कविता पर भी सबका हक़ है।
The Goose and the Common
The law locks up the man or woman. Who steals the goose from off the common
But leaves the greater villain loose
Who steals the common from the goose.
The law demands that we atone
When we take things we do not own
But leaves the lords and ladies fine
Who take things that are yours and mine.
The poor and wretched don’t escape
If they conspire the law to break;
This must be so but they endure
Those who conspire to make the law.
The law locks up the man or woman
Who steals the goose from off the common
And geese will still a common lack
Till they go and steal it back
— Anonymous, "The Goose and the Common
नीचे इस कविता का हिंदी अनुवाद है। अनुवाद के लिए थोड़ी बहुत chat GPT की मदद ली है। मेरा इस अनुवाद पर किसी तरह का कोई हक़ नहीं है । ईश्वर करे ये कबीर की रचनाओं तरह ही सबकी कविता बन जाए। आप यदि मुझसे बेहतर अनुवाद कर सकें तो कृपया अपने नाम से न करें। यह लोक-कवियों की परंपरा का अपमान होगा। इसको इस अनुवाद से बेहतर बनाइये और फिर खुशबू की तरह इसे ऐसे ही हर उस आदमी तक पहुँचाने में मदद कीजिये जिसे इसकी ज़रुरत हो।
हिरन और उसका जंगल
क़ानून कहे—अरे पकड़ो उसे,
जो जंगल से हिरन चुराए ;
पर जो पूरा जंगल हड़पे,
वो राजा बनकर बांसुरी बजाये।
छोटी चोरी पर डाँट-डपट,
कहे—“गलती मानी? जुर्माना भर!”
पर सूट-बूट में साहब लोग
ले जाएँ दुनिया घर दर घर।
ग़रीब अगर क़ानून तोड़े ,
तो पहरा उस पर दिन-रात लगे;
पर जो क़ानून गढ़े अपने मन से,
उन पर न कोई आँच लगे।
क़ानून कहे—अरे पकड़ो उसे,
जो जंगल से हिरन उठा लाए;
हिरन अब अपना जंगल पाए,
जब लौटे पूरी हिम्मत भर;
धक्का देके, जोर लगाकर,
ले ले वापस अपना घर।
कानून बनता ही गरीबों के लिए है।
ReplyDeleteThanks for sharing
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