जून का महीना बीतने को है, लेकिन क्या आपने गौर किया है कि आसमान से वो राहत की फुहारें गायब हैं जिनका हम हर साल इंतजार करते हैं? आज जब हम और आप यह बात कर रहे हैं, भारत इस सदी के सबसे गंभीर मानसून संकटों में से एक का सामना कर रहा है। सरकारी आंकड़ों (IMD) के मुताबिक, इस साल जून के महीने में सामान्य से करीब 42% से 46% तक कम बारिश दर्ज की गई है, जिसने 21वीं सदी के सबसे सूखे जून की याद दिला दी है। देश के मुख्य कृषि क्षेत्रों जैसे महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात में हाहाकार है; किसान बुआई नहीं कर पा रहे हैं और कंक्रीट के शहर गर्मी से उबल रहे हैं। आमतौर पर मानसून के इस तरह अचानक रूठ जाने या थम जाने का सारा दोष 'ग्लोबल वॉर्मिंग', अल-नीनो (El Niño) या समुद्र के गर्म होने के सिर मढ़ दिया जाता है। लेकिन भारत के बेहतरीन वैज्ञानिकों की लगातार आ रही रिसर्च ने एक ऐसा कड़वा सच सामने रखा है, जिसके जिम्मेदार कहीं न कहीं हम खुद हैं। विज्ञान कहता है कि मानसून के इस तरह कमजोर होने की एक बहुत बड़ी वजह हमारे ठीक सामने है— हमारे देश की जमीन के उपयोग, खेती के तौर-तरीकों और हरियाली के बदलते स्वरूप (LUL...
वैज्ञानिकों की शह पर कैसे औद्योगिक क्षेत्र ने पशुधन उत्सर्जन की पूरी बहस का रुख अपने फायदे में मोड़ लिया है कैमल फ्यूचर्स (Camel Futures) मूल लेखक: इल्से कोहलर-रोलेफ्सन (Ilse Köhler-Rollefson) मूल ब्लॉग का लिंक: https://open.substack.com/pub/1805ilse/p/camels-methane-and-the-reductionist?r=35vkn0&utm_campaign=post-expanded-share&utm_medium=web ऑस्ट्रेलिया में ऊँटों को एक समस्या (pests) माना जाता है और उनकी संख्या पर काबू पाने के लिए अक्सर उन्हें हेलीकॉप्टर से गोली मार दी जाती है। यह हकीकत दुनिया भर के ऊँट प्रेमियों को बहुत परेशान करती है। लगभग 15 साल पहले, ऑस्ट्रेलिया के इन जंगली ऊँटों को मारकर 'कार्बन क्रेडिट' कमाने की योजना भी बनाई गई थी। दावा यह था कि हर ऊँट हर साल एक टन मीथेन छोड़ता है—एक ऐसी ग्रीनहाउस गैस जो 20 साल के पैमाने पर देखें तो कार्बन डाइऑक्साइड ( $CO_2$ ) से 80 गुना ज्यादा खतरनाक है। इसके जवाब में, मोरक्को के वैज्ञानिकों की एक टीम ने एक रिसर्च की ताकि ऊँटों और गायों के मीथेन उत्सर्जन की सीधी तुलना की जा सके। उन्होंने पाया कि अगर दोनों को एक जै...