हम डरते हैं ब्लू टोकाई कॉफी के हम से छीन लिए जाने से गाडी में पेट्रोल न होने से बर्तन मांजने वाली की तनख्वाह न दे पाने के ख्याल से ट्विटर पर बैन कर दिए जाने से घर में मंगलवार को अंडा खाने से नौकरी के छूट जाने से ठीक से इलाज़ न हो पाने से और खबरें सुनने से भी इसलिए सर झुका खामोश रहते हैं ए.सी. की दुकान पर मोलभाव नहीं करते सब्जी वाले से करते हैं अपने सामने कुरु परिवार की तरह द्रौपदी का चीरहरण होते देखते रहते हैं कभी कभी वोट दे आते हैं किसी फेसबुक पोस्ट को लाइक कर देते हैं फैज़ की ग़ज़ल सुन लेते हैं बच्चों के साथ बात करते करते, कभी कभी सो जाते हैं हाँ बच्चे जिनकी तुलना कॉकरोचों से की जा रही है वो हमारी सबसे नायाब रचना हैं हम ने उन्हें अपने प्यार से बनाया हमारे द्वारा सोचे गए सबसे उम्दा और पवित्र ख्यालों की उपज जिन्हें ऋतुओं का ज्ञान नहीं होगा जो हमारे डरों की कीमत चुकाएंगे क्या हम अपनी बेबसी उनको देकर जायेंगे ?
सम-सामायिक विषयों, पोस्ट डेवलपमेंट (उत्तर विकासवाद) और विकास के वैकल्पिक मार्गों की बात; जंगल के दावेदारों की कहानियां, कुछ कविताएं और कुछ अन्य कहानियाँ, व्यंग्य